Part of me..
Thursday, July 21, 2011
haunting intoxication
ये रात ये चांदनी फिर कहाँ..
सुन जा दिल की दास्ताँ..
हम्म हम्म हम्म..
पेड़ों की शाखों पे
सोयी सोयी चांदनी
तेरे ख्यालों में
खोयी खोयी चांदनी
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी
रात ये बहार की फिर कभी ना आएगी
दो एक पल है और ये समां..
हम्म हम्म हम्म..
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